रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु
देश में सरकारी विद्यालयों की लगातार गिरती स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में बच्चे सरकारी स्कूलों को छोड़ निजी विद्यालयों की ओर रुख कर रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती असमानता और सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन को लेकर शिक्षा जागरण मंच के सचिव रामेश्वर गोप ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
रामेश्वर गोप ने कहा कि सरकारी विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि गरीब, मजदूर, किसान और ग्रामीण परिवारों के बच्चों के सपनों की नींव हैं। यदि सरकारी स्कूल कमजोर होंगे तो समाज का बड़ा वर्ग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो जाएगा। इसलिए सरकारी विद्यालयों को बचाना और मजबूत बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आज कई सरकारी विद्यालय शिक्षक की कमी, जर्जर भवन, पेयजल, शौचालय, खेल मैदान और आधुनिक संसाधनों के अभाव से जूझ रहे हैं। यही कारण है कि अभिभावक मजबूरी में निजी विद्यालयों की ओर जा रहे हैं। जबकि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और इसे मजबूत सरकारी शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जा सकता है।
रामेश्वर गोप ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे किसी भी मायने में कम प्रतिभाशाली नहीं हैं। जरूरत केवल उन्हें बेहतर माहौल, नियमित शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रोत्साहन देने की है। उन्होंने कहा कि सरकार को विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति तेज करनी चाहिए, बंद हो रहे स्कूलों को बचाना चाहिए तथा शिक्षा के बजट में वृद्धि करनी चाहिए।
उन्होंने समाज, जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और शिक्षकों से भी अपील करते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों को बचाने के लिए आगे आना होगा। अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में कराया जाए और विद्यालयों की समस्याओं को मिलकर दूर किया जाए। तभी समान और सशक्त शिक्षा व्यवस्था का सपना साकार हो सकेगा।
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