बोकारो जिले के महुआटांड़ थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक दिन पहले ही हाथियों के हमले में तीन बुजुर्गों की जान जाने के बाद शनिवार को एक बार फिर हाथियों के झुंड ने गंगपुर गांव में भारी तबाही मचाई। इस ताजा घटना में एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई, जबकि तीन बच्चों समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों के अनुसार, शनिवार को हाथियों का झुंड अचानक गंगपुर गांव में घुस आया और सोमर साव के घर पर हमला कर दिया। घर में मौजूद लोग जान बचाने के लिए छत की ओर भागे, लेकिन हाथियों ने परिवार के सदस्यों को घेर लिया। इस दौरान सोमर साव और उसके तीन वर्षीय पोते की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान सोमर साव और अमन साव के रूप में हुई है। हमले में घायल एक बुजुर्ग महिला और तीन बच्चों को इलाज के लिए रामगढ़ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। परिजन शैलेश कुमार महतो ने इस हादसे के लिए जंगलों में हो रही अंधाधुंध कटाई और अवैध खनन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आवास नष्ट होने के कारण हाथी रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे जान-माल का नुकसान बढ़ता जा रहा है। उन्होंने वन विभाग से हाथियों को सुरक्षित वन क्षेत्रों की ओर भेजने की मांग की है। स्थानीय निवासी रवि महतो ने बताया कि पिछले करीब छह महीनों से हाथियों का झुंड रामगढ़-बोकारो सीमा से सटे इलाकों में डेरा डाले हुए है। दोनों जिलों में लगातार हाथी हमलों से लोगों की जान जा रही है, बावजूद इसके हाथियों को सुरक्षित कॉरिडोर में ले जाने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बोकारो के वन प्रमंडल पदाधिकारी संदीप शिंदे ने बताया कि हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि क्यूआरटी की टीमें लगातार हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने में लगी हुई हैं। साथ ही रामगढ़ और पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ दल को भी बुलाया गया है। डीएफओ ने एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से रात के समय घरों से बाहर न निकलने और केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही बाहर जाने की अपील की है।
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