रांची: झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर आज, 9 अक्टूबर को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले पर हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हुई हैं। अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि परीक्षा रद्द करने के फैसले को लेकर आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।
दरअसल, राज्य सरकार ने जांच में कथित अनियमितताओं के आधार पर JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं का पक्ष है कि परीक्षा रद्द करने के फैसले पर विचार करते समय उन अभ्यर्थियों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जिन्होंने मेहनत और निष्पक्ष तरीके से परीक्षा पास की है।
परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं में 11वीं से 13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती से जुड़े मामले शामिल हैं। इन परीक्षाओं के प्रभावित अभ्यर्थी न्यायालय से राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
राज्य सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने के फैसले के समर्थन में जांच के दौरान सामने आए कथित साक्ष्यों और अनियमितताओं का हवाला दिया गया है। सरकार का पक्ष है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हुई है, तो पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से परीक्षा रद्द करने के निर्णय पर सवाल उठाए गए हैं। उनका तर्क है कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए और निष्पक्ष तरीके से सफल हुए अभ्यर्थियों के हितों पर भी विचार होना चाहिए। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय अदालत को तथ्यों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर लेना है।
Leave a comment