किशोरी राणा ने हज़ारीबाग की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर तीखा हमला बोलते हुए सत्ता पक्ष और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिले की राजनीति इन दिनों बयानबाज़ी, अहंकार और वर्चस्व की लड़ाई में उलझ चुकी है, जहां सांसद बनाम विधायक की टकराहट खुली राजनीतिक जंग का रूप लेती दिखाई दे रही है, लेकिन इस पूरे संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का हो रहा है।
किशोरी राणा ने तंज कसते हुए कहा कि “हज़ारीबाग आज मानो महाभारत की आग में जल रहा है। कोई सम्मान बचाने में लगा है तो कोई अपमान का हिसाब चुकाने में, लेकिन जनता की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली, पानी, सड़क और अस्पताल जैसी बुनियादी समस्याओं से लोग परेशान हैं, जबकि सत्ता के चेहरे सम्मान और प्रतिष्ठा की राजनीति में व्यस्त हैं।
उन्होंने नगर निगम की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि महापौर और नगर निगम आयुक्त के बीच खींचतान से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। शहर की सड़कें बदहाल हैं, स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर हैं और कई इलाकों में लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। साथ ही उन्होंने उपमहापौर की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि जनता को सक्रिय नेतृत्व दिखाई नहीं दे रहा।
किशोरी राणा ने कहा कि जनता को नेताओं की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से कोई सरोकार नहीं है। अगर जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं को लेकर उतने ही गंभीर और आक्रामक होते, जितने राजनीतिक सम्मान की लड़ाई में दिखाई दे रहे हैं, तो आज हज़ारीबाग की तस्वीर कुछ और होती।
अंत में उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता सब देख रही है और आने वाले समय में फैसला यह होगा कि हज़ारीबाग को सम्मान की राजनीति चाहिए या काम की राजनीति।
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