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*मांडू हेसाबेड़ा स्थित संथाल समाज दिशोम मांझी परगना द्वारा जन-समस्या मूलभूत मुद्दों एवं पांच नवंबर को विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रेस कांफ्रेंस*

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Khabar365news

रिपोर्ट: ब्यूरो मंसूर खान के साथ मो साबिर मांडू

रामगढ़ जिले के सीमावर्ती क्षेत्र मांडू हेसाबेड़ा स्थित आज लुगू बुरु घंटाबाड़ी लाल पनिया में केंद्र सरकार के ग़लत नितियों से समाज के आस्था को ठेस पहुंचने को लेकर केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने पांच नवंबर को विरोध प्रदर्शन करने को लेकर प्रेस कांफ्रेंस किया,जिस बीच महासचिव सोनाराम मांझी, कोषाध्यक्ष एतको बसके उपस्थित थे।वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने कहा सरकार द्वारा प्रस्तावित 1500 मेगावट हाईडल पवार प्रोजेक्ट से संथाल जनजातियों के धार्मिक स्थल लुगू बुरू घंटाबाड़ी प्रभावित कर समाप्त किया जा रहा है। हम संथाल इसे अपने धार्मिक स्थल पर हमला के रूप में देखते हैं जिसे लेकर आज प्रेस कांफ्रेंस के द्वारा विरोध जताया गया।साथ ही भारत सरकार से माँग है कि लुगू बुरू घंटाबाड़ी जो धार्मिक केन्द्र बिन्दू है उसे संरक्षित करते हुए डी.वी.सी. के प्रस्तावित हाईडल पवार प्रोजेक्ट को निरस्त किया जाए। इसके लिए झारखण्ड सरकार पहल करें।वहीं दुसरा प्रस्ताव मरांग बुरु परसनाथ पहाड़ गिरिडीह झारखण्ड में अवस्थित संथाल जनजातियों का युग जाहेर धार्मिक आस्था का केन्द्र है। सरकार के गजट एवं सर्वे अधिसूचना में मरांग बुरू धार्मिक स्थल के रूप में स्पष्ट उलेख है। हम संथाल जनजाति किसी भी धर्म का विरोधी नहीं है। हमलोग प्राकृतिक द्वारा निर्मित सूरज, चांद जंगल, पहाड़ों, नदी-नालों को ईश्वर का स्वरूप मान कर पूजा करते हैं। परन्तु जैन समुदाय के द्वारा हमारी धार्मिक अस्था का केन्द्र मरांग बुरू युग जाहेर का अतिक्रमण का हम संथाल विरोध करते है। केन्द्र एवं राज्य सरकार से माँग है कि प्राकृतिक धरोहर हम संथालों के धार्मिक अस्था केन्द्र मरांग बुरु युग जाहेर को संरक्षित करते हुए हो रहे जैन समुदाय के द्वारा अतिक्रमण पर पूर्ण रोक लगाया जाए। अन्यथा हम समाज के सभी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे साथ ही केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने कहा कि संथाल समाज दिशोम माँझी परगना जो संथाल जनजातियों का एक समाजिक संगठन है। संथाल जनजाति पूर्वी भारत की सबसे बड़ी जनजाति है। विशेष कर झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार कुछ भाग असम एवं नेपाल, भूटान एवं बंगलादेश में निवास करते हैं। संथाल जनजाति अपनी रूढी, रीति-रिवाज से मार्ग दर्शित होते हैं। संथाल जनजाति अपनी रूढी रीति-रिवाज से मार्ग दर्शित होना अधिकार है ऐसे में सरकार द्वारा चलाई जा कंपनी द्वारा हमारे धार्मिक स्थल को नुक्सान पहुंचाया जा रहा जो उचित नहीं जिसका 5 नवंबर को लालपनिया मे पुरजोर विरोध किया जाएगा।

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