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चतरा : शिक्षक के समर्पण और ग्रामीणों के सहयोग ने गांव के विद्यालय को बनाया खास, शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह हाईटेक

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आमतौर पर सरकारी विद्यालयों का नाम सुनते ही बदहाली और कुव्यवस्था की छवि सामने आती है। लेकिन चतरा जिले के टंडवा प्रखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय हेसातू ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। विद्यालय को न सिर्फ खास पहचान मिली है, बल्कि इसे जिले में मॉडल स्कूल के तौर पर भी जाना जाता है।

विद्यालय के रखरखाव और देखरेख को मॉडल स्कूल की तरह किया जाता है, वहीं शिक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह हाईटेक है। जिले में सैंकड़ों विद्यालय संचालित हैं, लेकिन हेसातू विद्यालय की पहचान अलग है। यहां गार्डेन, स्मार्ट क्लासेस, कंप्यूटर क्लास और स्वच्छता जैसी व्यवस्थाएं किसी बड़े प्राइवेट स्कूल की याद दिलाती हैं। विद्यालय की इस नई तस्वीर के पीछे शिक्षक विनेश्वर कुमार का बड़ा योगदान है। जब वर्ष 2002 में उनकी पोस्टिंग इस विद्यालय में हुई थी, तब यह एक साल से बंद पड़ा था। जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे इस गांव में न सड़क थी, न ही शिक्षकों की रुचि। इलाके में नक्सलियों की गतिविधियों के चलते कोई भी शिक्षक यहां आना नहीं चाहता था।

शिक्षक विनेश्वर कुमार ने ग्रामीणों के साथ मिलकर शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का काम शुरू किया। ग्रामीणों ने भी उनका पूरा सहयोग किया। धीरे-धीरे विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था और आधारभूत ढांचा सुधरता गया। आज परिणाम यह है कि विद्यालय में पहली से दसवीं कक्षा तक 600 से अधिक छात्र नामांकित हैं। बच्चों को हाईटेक तरीके से पढ़ाया जाता है। विद्यालय के बच्चे बताते हैं कि उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे वे किसी बड़े प्राइवेट विद्यालय में पढ़ रहे हों। स्मार्ट बोर्ड और कंप्यूटर क्लासेस के माध्यम से विषयों को आसानी से समझाया जाता है। हालांकि, विद्यालय में दो विषयों के शिक्षकों की कमी है, जिसे लेकर बच्चे सरकार और जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक दासो राणा बताते हैं कि इस स्कूल को इस मुकाम तक पहुंचाने में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2022 में राज्य के शिक्षा सचिव ने शिक्षक विनेश्वर कुमार को उनके योगदान के लिए सम्मानित करते हुए एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी थी। इस राशि से विद्यालय में खेल मैदान का निर्माण कराया जा रहा है।

बहरहाल, शिक्षक के समर्पण और ग्रामीणों के सहयोग से नक्सल प्रभावित क्षेत्र का यह विद्यालय आज मॉडल स्कूल बन चुका है। अब जरूरत है कि सरकार भी इस प्रयास को सराहते हुए विद्यालय के रखरखाव और विकास में सहयोग करे, ताकि सरकारी विद्यालयों को लेकर लोगों की सोच बदली जा सके और बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।

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