
पाकुड़ ब्यूरो जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
“उद्घाटन हुआ… और शुरू हो गई दरारों की कहानी!”
पाकुड़ के हिरणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन, जो लोगों की सेवा के लिए बना था, अब खुद ही सहारे पर खड़ा नजर आ रहा है।
“दीवारों में दरार या सिस्टम में दरार?”
महज 4 महीने में दीवारों और पिलरों का फटना बता रहा है कि कहीं न कहीं खेल बड़ा हुआ है।

41 लाख खर्च… लेकिन मजबूती शून्य!”
ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट के तहत 2025 में बना ये भवन
अब सवाल बन गया है—
पैसा गया कहां?
जिम्मेदार कौन?
ग्रामीणों का गुस्सा—ये लापरवाही नहीं, सीधा खेल है!”
स्थानीय लोगों का आरोप:
घटिया सामग्री का इस्तेमाल
निर्माण में भारी गड़बड़ी
जिम्मेदारों की मिलीभगत
“इलाज की जगह खतरे का अड्डा!”
इस जर्जर भवन में मरीजों का इलाज हो रहा है—जो कभी भी बड़े हादसे में बदल सकता है।
“जांच के नाम पर लीपापोती?”
कनीय अभियंता जनार्दन मंडल का बयान—“जांच होगी, कार्रवाई होगी।”
लेकिन सवाल वही—
कब तक?
किस पर?
“जनता का पैसा… और जनता ही खतरे में!”
अब पाकुड़ की जनता पूछ रही है—
क्या 41 लाख की ये दरार सच छुपा पाएगी या किसी की कुर्सी हिलाएगी?
पाकुड़ गरज रहा है — जवाब दो! जवाब दो! जवाब दो!
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