
बैधनाथ कामती की अगुवाई में हजारीबाग की सड़कों पर शनिवार को एक ऐसा सड़क सुरक्षा अभियान चला, जिसने लोगों को सिर्फ नियमों का डर नहीं, बल्कि जिंदगी की कीमत समझाई। यह अभियान आम वाहन जांच से बिल्कुल अलग और बेहद प्रेरणादायक रहा, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय स्तर के पर्वतारोहियों ने सीधे सड़क पर उतरकर वाहन चालकों की काउंसलिंग की और सुरक्षित सफर का संदेश दिया।
शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर चलाए गए इस विशेष अभियान में बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और लापरवाही से वाहन चलाने वालों को रोका गया। लेकिन यहां केवल चालान नहीं काटे गए, बल्कि चालकों को समझाया गया कि सड़क पर छोटी सी लापरवाही किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है। राष्ट्रीय पर्वतारोहियों ने अपने साहसिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि जैसे पहाड़ों पर सुरक्षा उपकरण जीवन बचाते हैं, वैसे ही सड़क पर हेलमेट और सीट बेल्ट इंसान की सबसे बड़ी ढाल हैं।

अभियान के दौरान पर्वतारोहियों ने युवाओं और बाइक चालकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि “घर से निकलते समय हेलमेट सिर्फ नियम नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा का वादा है।” इस अनोखे अंदाज ने आम लोगों पर गहरा असर छोड़ा और कई वाहन चालकों ने मौके पर ही भविष्य में यातायात नियमों का पालन करने की शपथ ली।

इस पूरे अभियान में मनोज कुमार की सक्रिय निगरानी और रणनीतिक भूमिका साफ नजर आई। वहीं अनूप प्रसाद ने यातायात पुलिस बल के साथ सड़क पर मुस्तैदी दिखाते हुए अभियान को प्रभावी बनाया। विजय गौतम द्वारा वाहन जांच और नियम उल्लंघन पर कड़ी नजर रखी गई, जबकि परिवहन विभाग की आईटी टीम ने तकनीकी सहयोग देकर अभियान को और मजबूत बनाया।
जिला परिवहन पदाधिकारी बैधनाथ कामती ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्रशासन का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि हर नागरिक को सुरक्षित घर पहुंचाना है। उनकी नेतृत्व क्षमता और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सोच इस अभियान में साफ दिखाई दी। लगातार जागरूकता कार्यक्रम, काउंसलिंग और सख्त वाहन जांच के जरिए हजारीबाग परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
हजारीबाग में चला यह अनोखा अभियान अब सिर्फ वाहन जांच नहीं, बल्कि “जिंदगी बचाने की मुहिम” बन चुका है, जिसकी चर्चा पूरे जिले में हो रही है।
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