सरायकेला: झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विश्वप्रसिद्ध सरायकेला छऊ नृत्य को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। सरायकेला के दो प्रतिभाशाली छऊ कलाकारों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए चयनित किया गया है। इस उपलब्धि से जिले सहित पूरे राज्य में खुशी का माहौल है।
प्रख्यात छऊ कलाकार Sushant Mahapatra को देश के प्रतिष्ठित Sangeet Natak Akademi पुरस्कार के लिए चुना गया है। वहीं युवा छऊ कलाकार Kunal Samal को Ustad Bismillah Khan Yuva Puraskar से सम्मानित किया जाएगा।
सुशांत महापात्र लंबे समय से सरायकेला छऊ नृत्य की परंपरा को संरक्षित और प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने देश-विदेश के विभिन्न मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर इस लोकनृत्य को नई पहचान दिलाई है। वहीं कुनाल सामल ने युवा पीढ़ी के बीच छऊ नृत्य को लोकप्रिय बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
कला और संस्कृति से जुड़े लोगों ने इसे सरायकेला और झारखंड के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि इन सम्मानों से राज्य की पारंपरिक लोककलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिलेगी तथा युवा कलाकारों को भी प्रेरणा मिलेगी।
इस उपलब्धि पर कलाकारों को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। सांस्कृतिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और कला प्रेमियों ने दोनों कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान एक बार फिर साबित करती है कि सरायकेला छऊ नृत्य आज भी भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।
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