
हजारीबाग: एक तरफ आसमान से बरसती आग और रिकॉर्ड तोड़ते तापमान ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, वहीं दूसरी तरफ हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पेलावल (दक्षिणी) से सरकारी तंत्र की घोर संवेदनहीनता का बड़ा मामला सामने आया है। इस भीषण गर्मी में पानी की भारी किल्लत के कारण पूरी पंचायत में ‘त्राहिमाम’ की स्थिति पैदा हो गई है। सरकारी फाइलों में तो जनता की प्यास बुझाने के लिए योजनाएं मुकम्मल दिखती हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत बेहद खौफनाक है। इस गंभीर संकट को देखते हुए स्थानीय मुखिया नूरजहाँ ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता को पत्र लिखकर सीधे तौर पर चेतावनी दी है और युद्ध स्तर पर सुधार की मांग की है।
सरकारी दावों की पोल खोलते हुए मुखिया नूरजहाँ ने बताया कि ग्राम पंचायत पेलावल दक्षिणी में ग्रामीणों की सहूलियत के लिए लगभग 32 जलमीनारें लगाई गई थीं, ताकि हर घर तक पानी पहुँच सके। लेकिन विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि इनमें से महज 6 से 7 जलमीनारें ही चालू हालत में हैं, जबकि बाकी की करीब 26 जलमीनारें स्थापना के बाद से ही शोपीस बनकर सफेद हाथी साबित हो रही हैं। करोड़ों रुपये की लागत से खड़ी की गई ये योजनाएं आज धूल फांक रही हैं और जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। जलमीनारों के ठप होने के बाद जो चापाकल ग्रामीणों का आखिरी सहारा थे, वे भी उचित रखरखाव के अभाव में दम तोड़ चुके हैं।
इस जल संकट ने पेलावल की जनता को इस भीषण तपिश में सड़क पर आने को मजबूर कर दिया है। पानी की तलाश में महिलाओं और बच्चों को चिलचिलाती धूप में मीलों दूर भटकना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। मुखिया द्वारा 25 मई को विभाग को सौंपे गए इस आधिकारिक पत्र में साफ कहा गया है कि यदि इस गंभीर समस्या को देखते हुए सभी खराब जलमीनारों और चापाकलों को जल्द से जल्द दुरुस्त कर चालू नहीं किया गया, तो स्थिति हाथ से निकल सकती है। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया पेयजल एवं स्वच्छता विभाग इस पत्र के बाद जागता है या पेलावल की प्यासी जनता को इस नरकीय स्थिति में तड़पने के लिए उनके हाल पर छोड़ देता है।
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