
पाकुड़ ब्यूरो जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
पाकुड़: झारखंड-बंगाल सीमा से सटे पाकुड़ जिले के मालपहाड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत कानूपुर गांव के पास स्थित एक पत्थर खदान में सोमवार सुबह दर्दनाक हादसा हो गया। खदान के ऊपर जमा मिट्टी और मलबा अचानक धंस जाने से वहां काम कर रहे कई मजदूर उसके नीचे दब गए। स्थानीय लोगों के अनुसार इस हादसे में तीन से पांच मजदूरों की मौत की आशंका जताई जा रही है, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक मौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बताया जा रहा है कि सोमवार सुबह मजदूर रोजाना की तरह खदान में पत्थर तोड़ने और लोडिंग का काम कर रहे थे। इसी दौरान खदान के ऊपरी हिस्से में जमा भारी मिट्टी और मलबा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। देखते ही देखते कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई और आसपास के ग्रामीणों में हड़कंप मच गया।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर मलबा हटाकर मजदूरों को निकालने की कोशिश करने लगे। कुछ मजदूरों को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया, जबकि कई मजदूरों के मलबे के नीचे दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह खदान लंबे समय से अवैध तरीके से संचालित हो रही थी और यहां मजदूरों से बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के काम कराया जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान संचालक अली खान द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए खनन कराया जा रहा था, लेकिन प्रशासन की ओर से कभी सख्त कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही और पत्थर माफिया की मनमानी के कारण यह बड़ा हादसा हुआ है, जिसमें कई परिवारों के घर के चिराग बुझ गए।
हादसे के बाद यह भी चर्चा है कि मलबा हटाकर वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश की जा रही है, ताकि घटना की गंभीरता सामने न आ सके। हालांकि इस संबंध में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है और मलबे में दबे अन्य मजदूरों की तलाश की जा रही है। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घटना की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाने की भी मांग उठने लगी है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पाकुड़ में अवैध खनन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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