पटना। बिहार सरकार जल संसाधनों और विभागीय संपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल के लिए नया मॉडल तैयार कर रही है। इसके तहत एक नया निगम गठित कर रिवर फ्रंट, जलाशयों और विभागीय संपत्तियों के विकास और प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
नए निगम के जरिए जल संसाधन विभाग की ऐसी संपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग करने की योजना पर काम किया जा रहा है, जिनसे राजस्व जुटाया जा सके। रिवर फ्रंट के विकास के साथ पर्यटन और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर हो सकता है।
सरकार का उद्देश्य उपलब्ध जल संसाधनों और जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए रोजगार के अवसर पैदा करना और विभाग के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करना है।
इसके तहत नदी किनारे के क्षेत्रों में सुविधाओं का विकास, जलाशयों से जुड़ी गतिविधियां और विभागीय जमीन का योजनाबद्ध इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, परियोजनाओं का स्वरूप और नियम संबंधित स्तर पर तय किए जाएंगे।
निगम के गठन और उसके अधिकार क्षेत्र को लेकर आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद अलग-अलग परियोजनाओं की पहचान कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना बनाई जा सकती है।
फिलहाल बिहार सरकार के इस प्रस्तावित मॉडल का उद्देश्य जल संसाधनों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना और सरकारी संपत्तियों से अतिरिक्त राजस्व जुटाना है।
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