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भाजपा का ‘नारी शक्ति’ कार्ड सिर्फ एक चुनावी छलावा-अंबा प्रसाद

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अंबा प्रसाद ने खोला संवैधानिक प्रावधानों का पोल -खोल मोर्चा

रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक
पतरातु । कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने आज भाजपा के “महिला हितैषी” चेहरे को बेनकाब करते हुए भाजपा पर संविधान के अपमान और महिलाओं को ठगने का सनसनीखेज खुलासा किया।

राँची के कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंबा प्रसाद ने तथ्यों के साथ उजागर किया कि कैसे भाजपा आगामी चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए एक ‘संविधान विरोधी’ प्रपंच रच रही है।

इस महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की सचिव गुंजन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष रमा खलखो और मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की सहित कई वरिष्ठ नेत्रियां मौजूद रहीं।

अंबा प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि इतिहास उन्हें एक ऐसे प्रधानमंत्री के रूप में याद रखेगा, जिन्होंने प्रधानमंत्री की गरिमापूर्ण कुर्सी का इस्तेमाल जनता के बीच भ्रम और असत्य फैलाने के लिए तब किया जब चार-पाँच राज्यों मे विधानसभा चुनाव जारी थे। अम्बा प्रसाद ने ये सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या आपातकालीन परिस्थिति हो गई थी कि चुनाव के ऐन वक्त पर विशेष सत्र बुलाकर ये प्रपंच रचा गया था ? ये तो कोई ‘नेशनल क्राइसिस’ (राष्ट्रीय संकट) तो नहीं था ना ही ये ‘पॉलिटिकल क्राइसिस’ (राजनीतिक संकट) था , क्योंकि महिला आरक्षण बिल तो 2023 में ही पारित हो चुका था और तदनुसार संविधान मे भी आवश्यक अनुच्छेद जैसे 330A,332A,334A को जोड़ा जा चुका है तो सवाल ये उठता है की महिला आरक्षण बिल दुबारा कैसे पेश हुआ? एक ही बिल को कितना बार पेश किया जा सकता है ? जब कोई बिल पर वोटिंग होता है और वोटिंग पर बिल निरस्त होता है , तो किस देश के प्रधानमंत्री को देखे है की प्रधानमंत्री के कुर्सी मे बैठ के मीडिया के ज़रिए TV पर जनता को भ्रमित करने वाला भाषण देते है ?
भाजपा जानबूझकर देश की भोली-भाली जनता को गुमराह कर रही है क्योंकि वे जानते हैं कि भारत की अधिकांश आबादी गांवों में बसती है और मुख्य रूप से किसान है। उन्होंने आंकड़ों पर जोर देते हुए कहा कि देश में आज भी केवल 30% लोग ही शिक्षित हैं, और उनमें भी मुश्किल से 1% लोग ऐसे हैं जो कानून की गहरी समझ रखते हैं या संवैधानिक विषयों पर बात कर सकते हैं। इसी का फायदा उठाकर भाजपा के सांसद ,विधायक और तमाम नेता नेत्री मीडिया के ज़रिए जुलूस रैली निकालकर और घर घर जा कर देश की महिलाओं को झूठ बोलकर कांग्रेस के ख़िलाफ़ उकसा रहे है , जिसको कांग्रेस ने राजनैतिक संज्ञान मे लिया है और इस प्रेस कांफ्रेंस के ज़रिए पहला मुहिम छेड़ा है, BJP के झूठ और प्रपंच को उजागर करने के लिए एवम देश की महिलाओं को सच्चाई से रूबरू कराने के लिए । आगे और भी कार्यक्रम किए जायेंगे ताकि देश की महिलाओं को पता चले की असली महिला प्रताड़क कौन है और महिला विद्वेषी कौन है ।

संवैधानिक साक्ष्यों को पेश करते हुए अंबा प्रसाद ने जनता से अपील की कि वे स्वयं अपने मोबाइल पर संविधान की डिजिटल प्रति खोलकर सच देखें।

उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  • अनुच्छेद 330A: यह प्रमाणित करता है कि लोकसभा में 33% महिला आरक्षण 106वें संशोधन (2023) के तहत पहले ही पारित होकर दर्ज हो चुका है।
  • अनुच्छेद 332A: यह दर्शाता है कि राज्य विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए यह आरक्षण संवैधानिक रूप से सुनिश्चित हो चुका है।
  • अनुच्छेद 334A: यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आरक्षण लागू करने के लिए मुख्य शर्तें तय करता है। इसमें साफ़ लिखा है कि यह आरक्षण वर्ष 2023 के बाद होने वाली ‘जनगणना’ और उसके बाद होने वाले ‘परिसीमन’ के पश्चात ही प्रभावी होगा। ये आरक्षण पहले 15 साल के लिए लागू होगा और इसके बाद इसकी समीक्षा भी होगी ।

अंबा प्रसाद ने जोर देकर कहा, “कांग्रेस तो प्रमाण के साथ बात कर रही है, लेकिन भाजपा बिना किसी प्रमाण के केवल ‘भोंपू’ (लाउडस्पीकर) के जरिए दुष्प्रचार कर रही है।” अंत में, उन्होंने मीडिया (लोकतंत्र के चौथे स्तंभ) से आग्रह किया कि वे संविधान की गरिमा बचाएं रखने मे मीडिया का अहम भूमिका है और संविधान का दुष्प्रचार करने वालों को संविधान का चौथा स्तंभ बिल्कुल भी समर्थन न दें।

अब कांग्रेस ‘संविधान जागृति अभियान’ के माध्यम से भाजपा के इस ‘भ्रम जाल’ को तोड़ने के लिए मैदान में उतर चुकी है।

अंबा प्रसाद ने महिलाओं से जुड़े प्रसाधनों का एक बेहद रोचक उदाहरण देते हुए कटाक्ष किया कि भाजपा महिलाओं को लिपस्टिक देने का वादा कर रही थी, लेकिन डिब्बे के अंदर नेलपॉलिश डालकर रखी थी। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने तुरंत उस लिपस्टिक के डब्बे से नेलपॉलिश निकालकर के भाजपा के ही होठों पर लगा कर छोड़ दिया था और सोचे थे कि चुप हो जाएँगे पर भाजपा तो बहुत ही ज्यादा झूठ बोलने लगी इसलिए अब हमलोग उस नेलपॉलिश पर थोड़ी सच्चाई की हवा फूंक देते है, उम्मीद है की अब होठ चिपक जायेंगे और अब भाजपा वाले चुप हो जायेंगे , नहीं तो आगे कार्यक्रम की कमी नहीं है ।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा द्वारा लाया गया ‘नया बिल’ वास्तव में महिला आरक्षण से संबंधित था ही नहीं, बल्कि असंवैधानिक परिसीमन (Delimitation) की आड़ में उलझाकर एक नया भ्रम पैदा करने का प्रयास था। चूंकि वह बिल केवल एक गंभीर संवैधानिक त्रुटि और चुनावी छलावा था, इसीलिए वह गिर गया।

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